परीक्षाओं के दौरान बच्चों की डाइट में बदलाव के बारे में कितना सोचती हैं आप ? बल्कि परीक्षाओं के दौरान होता यह है कि जो बच्चे हमेशा सेहतमंद खाना खाना लेते हैं , वे भी इन दिनों खूब जंक फ़ूड कहते हैं और खुद को जगाये फ्राख्ने के लिए खूब साडी कॉफी पीते हैं जबकि इस दौरान बच्चों के खान पान का ध्यान रखने कि सबसे ज्यादा ज़रूरत होती हैं ……

बच्चों की डाइट में लाएं बदलाव

दिन कि शुरुआत नाश्ते से –

परीक्षा कि तयारी में जुटे बच्चे को सेहतमंद नाश्ता दें . उन्हें ओट्स मूसली उपमा खिचड़ी इडली खिला सकती हैं . इनका ग्लिसेमिक इंडेक्स काम होता है जो खून में शर्कर कि मात्रा एकदम से बढ़ने नहीं देता है . इससे बच्चे को लगातार और धीमी गति से ग्लूकोसेमिलता रहता है और उसे आलास के कारन नींद नहीं आती है

काम मात्रा मैं ज्यादा बार –

बच्चों को 3-4 बार भारी भरकम खाना खिलने से भी उन्हें नींद आती है और उनमे आलास आ जाता है क्यूंकि खून का दौरा दिमाग कि बज्जे पेट कि और दौड़ता है इसीलिए काम मात्रा में और पौष्टिक भोजन बनाकर उन्हें दे . उन्हें लगातार पोषण मिलता रहेगा तो वे अलर्ट और जागे हुए रहेंगे . ताज़ा फल, स्मूदी, सूखे और शहद लिपटे मेवे, सूप सलाद अच्छे विकल्प हो सकते हैं .

चीनी और प्रोसेस्ड फ़ूड नहीं –

चॉकलेट्स , कुकीज़ जैसी मीठी चीज़ें खून में चीनी कि मात्रा एकदम बढ़ा देती हैं इसके कुछ समय बाद आपको फिर से भूख लगने लगती है और जंक फ़ूड खाने कि ललक बढ़ जाती है . जंक फ़ूड खाने से दिमाग को कोई पोषण नहीं मिलता और नींद आती है .

पानी पिलाती रहें –
जब बच्चे आराम से बैठकर पढाई करते हैं खासकर ऐसी कमरों में तो उन्हें प्यास नहीं लगती है और वो बहुत कम पानी और दूसरे तरल पीते हैं और इससे उनके शरीर में पानी कि कमी हो जाती है . शरीर के देहाइड्रेटेड रहने से शरीर और दिमाग बेचैन और भौंचक्का रहने लगता है . ऐसे मैं ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है . जूस, छाछ, निम्बू पानी, ग्रीन टी दें .

बहुत ज्यादा कैफीन नहीं –

बहुत ज़्यादा कॉफी एनर्जी ड्रिंक्स चाय सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से बच्चे कि सरकार्डियन रिदम प्रभावित होती है और वह उसे तब सोने नहीं देती जब वह सोना चाहता है . इसके अलावा कैफीन नींद को केवल ससपेंड करता है क्योंकि कैफीन का असर कुछ घंटे शरीर में बना रहता है .

बाहर खाने से बचें –

परीक्षा के दौरान तनाव काफी ज़्यादा होता है और बच्चों कि रोग प्रतिरोधक क्षमता वैसे ही कम होती है .इसीलिए जहाँ तक संभव हो बहार खाने से बचें . यदि बच्चे कि बहार का खाना खाने कि ज्यादा इच्छा हो रही हो तो वही चीज़ें मंगाएं जो आप पहले माँगा चुकी हैं और वहीँ से मंगवाएं जहाँ कि शुद्धता पर आपो भरोसा हो .

दिमागी क्षमता बढ़ने वाला खाना –

एंटी ऑक्सीडेंट्स जैसे विटामिन ए सी और इ दिमाग कि कोशिकाओं को नष्ट होने से रोकते हैं, जो कि शरीर में तनाव के कारन बन रहे फ्री रेडिकल्स से लड़ने के कारन नष्ट हो रही होती हैं . अंडे, मछली, गाजर, कद्दू, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, ताज़ा फल बच्चों कि दिमागी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं. ये शरीर कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं .

स्ट्रेस कम करने वाला खाना दें –

परीक्षाओं के ढेर सरे तनाव और दबाव के बीच शरीर को पानी में घुलनशील विटामिन्स जैसे विटामिन बी काम्प्लेक्स विटामिन सी और मिनरल जैसे ज़िंक कि आवश्यकता होती है . ये सभी एड्रिनल हार्मोन्स के बनने और कार्यप्रणाली में मदद करते हैं . एड्रिनल हार्मोन्स ही तनाव से लड़ने वाले हार्मोन्स होते हैं. इसलिए बच्चों को ब्राउन राइस मेवे ताज़ी सब्जियां और फल दें .

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